हाल ही में एक इंडस्ट्री कॉन्फ्रेंस में, Sberbank के प्रेसिडेंट हरमन ग्रेफ ने रूस के अंदर स्टेबलकॉइन में सेटलमेंट की इजाज़त देने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि डिजिटल एसेट्स के लिए मौजूदा रेगुलेटरी मॉडल "सैंडबॉक्स" लेवल पर अटका हुआ है, जिससे देश में फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी के डेवलपमेंट के मौके कम हो रहे हैं। यह बयान बैंक ऑफ़ रूस के साथ बातचीत में Sberbank की स्थिति को दिखाता है और रियल इकॉनमी में ब्लॉकचेन इंस्ट्रूमेंट्स के इस्तेमाल के अपने तरीके पर फिर से सोचने की ज़रूरत को सामने लाता है।
Sberbank "सैंडबॉक्स" में क्यों फिट नहीं हो रहा है
ग्रेफ ने इस बात पर ज़ोर दिया कि रूसी फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर डिजिटल सेटलमेंट इंस्ट्रूमेंट्स के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल के लिए पहले से ही टेक्निकली तैयार है। हालांकि, मौजूदा नियम ब्लॉकचेन और डिजिटल एसेट्स के इस्तेमाल की इजाज़त सिर्फ़ एक्सपेरिमेंटल फॉर्मेट में देते हैं, जिससे बैंकों और बिज़नेस के लिए उनकी प्रैक्टिकल वैल्यू काफी कम हो जाती है।
Sberbank के प्रेसिडेंट के मुताबिक, बैंक स्टेबलकॉइन के साथ बेसिक ट्रांज़ैक्शन फंक्शनैलिटी का अधिकार पाने में दिलचस्पी रखता है, खासकर इंटरनल सेटलमेंट के लिए। उन्होंने कहा कि बिना स्केलेबिलिटी के लगातार टेस्टिंग न तो बैंकों की ज़रूरतों को पूरा करती है और न ही कॉर्पोरेट क्लाइंट्स की, जो पेमेंट की स्पीड, ट्रांसपेरेंसी और प्रेडिक्टेबिलिटी को महत्व देते हैं।
स्टेबलकॉइन के फ़ायदे
पारंपरिक करेंसी से जुड़े डिजिटल एसेट्स के तौर पर स्टेबलकॉइन कई फ़ायदे दे सकते हैं, जैसे:
- ट्रांज़ैक्शन स्पीड: स्टेबलकॉइन में पेमेंट पारंपरिक बैंक ट्रांसफ़र की तुलना में तेज़ी से प्रोसेस किए जा सकते हैं।
- कम फ़ीस: स्टेबलकॉइन का इस्तेमाल करने से ट्रांज़ैक्शन कॉस्ट कम हो सकती है।
- ट्रांसपेरेंसी: ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी ट्रांज़ैक्शन की हाई लेवल की ट्रांसपेरेंसी और ट्रेसेबिलिटी पक्का करती है।
बैंक ऑफ़ रशिया का रिएक्शन
बैंक ऑफ़ रशिया ने ग्रेफ़ की पहल पर जवाब दिया, डिजिटल एसेट्स और स्टेबलकॉइन पर अपनी मौजूदा स्थिति बताई। रेगुलेटरी अधिकारियों ने ज़ोर दिया कि रूस के अंदर पेमेंट के तरीके के तौर पर स्टेबलकॉइन समेत डिजिटल एसेट्स के इस्तेमाल पर विचार नहीं किया जा रहा है। उनका ट्रीटमेंट डिजिटल फ़ाइनेंशियल एसेट्स पर कानून के दायरे में तय किया जाना जारी है, न कि पूरी तरह से पैसे या पेमेंट इंस्ट्रूमेंट के तौर पर।
रेगुलेटर के प्रतिनिधि ने कहा, "हम रूस में पेमेंट के तरीके के तौर पर स्टेबलकॉइन या डिजिटल एसेट्स के इस्तेमाल की इजाज़त देने के लिए तैयार नहीं होंगे, और अभी भी तैयार नहीं हैं। मेरा मानना है कि हमारा डिजिटल पेमेंट स्पेस बहुत डेवलप है।"
निष्कर्ष
कॉन्फ्रेंस में हरमन ग्रेफ की स्पीच रूस में डिजिटल एसेट्स के भविष्य के बारे में ज़रूरी सवाल उठाती है। फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर के स्टेबलकॉइन को लागू करने के लिए तैयार होने के बावजूद, बैंक ऑफ़ रूस का रुख कंजर्वेटिव बना हुआ है। देश का डिजिटल एसेट मार्केट कैसे डेवलप होगा, यह सवाल अभी भी खुला है, और रेगुलेटर के अगले कदम यह तय करेंगे कि रूस कितनी जल्दी नई टेक्नोलॉजी को अपने फाइनेंशियल सिस्टम में इंटीग्रेट कर सकता है।