Sberbank के CEO हरमन ग्रेफ ने कहा कि बैंक रूस के सेंट्रल बैंक के उस फैसले पर भरोसा कर रहा है जिससे घरेलू मार्केट के लिए रूबल-डिनॉमिनेटेड स्टेबलकॉइन जारी करने की इजाज़त मिलेगी। उन्होंने कहा कि ऑथराइज़्ड ट्रांज़ैक्शन फंक्शनैलिटी की कमी रूसी ब्लॉकचेन को सैंडबॉक्स स्टेट में रखती है और डिजिटल इकॉनमी के डेवलपमेंट में रुकावट डालती है।
रेगुलेटर के साथ चर्चा
ग्रेफ ने कहा कि Sberbank रेगुलेटर के साथ रेगुलेशन के मुद्दे पर एक्टिव रूप से चर्चा कर रहा है और जल्द ही इस मुद्दे पर एक मीटिंग की उम्मीद है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि रूसी कानून अभी सिर्फ़ विदेशी आर्थिक एक्टिविटी के लिए स्टेबलकॉइन जारी करने की इजाज़त देता है, जिससे घरेलू मार्केट के लिए मौके कम हो जाते हैं।
नए स्टेबलकॉइन के लिए पैरामीटर
ग्रेफ ने कई खास शर्तें बताईं जिनके तहत स्टेबलकॉइन का लॉन्च मुमकिन होगा:
1. एसेट के स्टेटस की रेगुलेटरी परिभाषा: स्टेबलकॉइन का लीगल स्टेटस कानून के दायरे में साफ़ तौर पर तय होना चाहिए।
2. वन-टू-वन कोलैटरलाइज़ेशन: स्टेबलकॉइन को फ़ेडरल लोन बॉन्ड (OFZs) और दूसरे लिक्विड एसेट्स से सपोर्टेड होना चाहिए, जिससे मनी सप्लाई पर कोई असर न पड़े।
3. सेंट्रल बैंक की देखरेख में जारी करने वाला: स्टेबलकॉइन जारी करने वाला रेगुलेटर के कंट्रोल में होना चाहिए।
4. पब्लिक ब्लॉकचेन पर लिस्टिंग: ट्रांसपेरेंसी और एक्सेसिबिलिटी पक्का करने के लिए स्टेबलकॉइन को ओपन ब्लॉकचेन पर लिस्टेड होना चाहिए।
ग्रेफ़ ने यह भी बताया कि स्टेबलकॉइन का इस्तेमाल सेटलमेंट, सेविंग्स, कैपिटल जुटाने और डिजिटल इकोनॉमी तक रेगुलेटेड एक्सेस देने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि रूस ने माइनिंग और डिजिटल राइट्स को रेगुलेट करने के लिए पहले ही कदम उठाए हैं, लेकिन परमिटेड इंटरनल ट्रांज़ैक्शन की कमी इंडस्ट्री के डेवलपमेंट को रोकती है।
रेगुलेटरी सैंडबॉक्स और रेगुलेशन का भविष्य
सेंट्रल बैंक ऑफ़ रूस ने नई टेक्नोलॉजी को टेस्ट करने के लिए एक रेगुलेटरी सैंडबॉक्स बनाया है और 2026 तक क्रिप्टो मार्केट का डायरेक्ट रेगुलेशन शुरू करने का प्लान है, जिसमें क्रिप्टो एक्सचेंज के लिए एक लीगल सिस्टम भी शामिल है। यह स्टेबलकॉइन और दूसरे डिजिटल एसेट्स को अपनाने के लिए ज़्यादा अच्छा माहौल बनाने की दिशा में एक ज़रूरी कदम हो सकता है।
सरकारी एजेंसियों की स्थिति
नवंबर में, सरकारी अधिकारियों ने स्टेबलकॉइन के कानूनी नेचर पर अपनी बात रखी। कॉन्स्टिट्यूशनल कोर्ट के एक सेशन में, स्टेबलकॉइन के कानूनी स्टेटस और रेगुलेशन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई, जिससे रूस के फाइनेंशियल सेक्टर के भविष्य के लिए इस टॉपिक की अहमियत पर ज़ोर दिया गया।
नतीजा
"लोगों के" रूबल-डिनॉमिनेटेड स्टेबलकॉइन का लॉन्च रूस में डिजिटल इकॉनमी के विकास की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकता है। हालांकि, इसे हासिल करने के लिए, कई कानूनी और रेगुलेटरी रुकावटों को दूर करना होगा, जिसके लिए फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन और सरकारी एजेंसियों के बीच एक्टिव सहयोग की ज़रूरत होगी।