दक्षिण कोरिया ने क्रिप्टोस्फीयर को रेगुलेट करने में एक अहम कदम उठाया है। देश के सुप्रीम कोर्ट ने क्रिमिनल जांच के दौरान एक्सचेंज वॉलेट से बिटकॉइन को ज़ब्त करने की लीगैलिटी को ऑफिशियली मान्यता दे दी है। इस फैसले से डिजिटल एसेट्स के लीगल स्टेटस पर सालों से चल रही बहस सुलझ गई है और कानून लागू करने वाली एजेंसियों की ताकतें बढ़ गई हैं।
ज़ब्ती से ज़ब्त करने तक: क्या फर्क है?
हाल तक, कोरियाई जस्टिस सिस्टम को एक प्रोसेस से जुड़ी मुश्किल का सामना करना पड़ रहा था। हालांकि पहले कोर्ट ट्रायल खत्म होने पर सरकार के लिए क्रिप्टोकरेंसी ज़ब्त कर सकते थे, लेकिन "ज़ब्ती" (जांच के दौरान एसेट्स को ज़ब्त करना) के तरीके ने ही सवाल खड़े कर दिए थे।
पहले, बचाव पक्ष के वकील अक्सर इस कानूनी कमी का फायदा उठाते थे, यह तर्क देते हुए कि बिटकॉइन सिर्फ डिजिटल कोड है और इसे फिजिकल सबूत के तौर पर "ज़ब्त" नहीं किया जा सकता। यह तर्क अब ऑफिशियली गलत साबित हो गया है।
"नागरिक A" का केस: कैसे एक मिसाल कायम हुई
यह अहम फैसला एक ऐसे यूज़र के केस से आया जिसे नकली नाम "A" से जाना जाता था, जिस पर मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप था। जनवरी 2020 में, पुलिस ने उसके एक्सचेंज अकाउंट में स्टोर 55.6 BTC (उस समय लगभग 600 मिलियन वॉन की कीमत) ज़ब्त किए थे।
बचाव पक्ष के वकीलों ने शिकायत दर्ज की, जिसमें तर्क दिया गया कि:
1. क्रिप्टोकरेंसी कोई फिजिकल चीज़ नहीं है।
2. फिजिकल सबूतों से जुड़े क्रिमिनल प्रोसीजर कोड के नियम डिजिटल एसेट्स पर लागू नहीं किए जा सकते।
बिटकॉइन एक इलेक्ट्रॉनिक जानकारी है जिसकी कीमत है
सुप्रीम कोर्ट ने बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज कर दिया, और एक साफ कानूनी मतलब बताया। जजों ने फैसला सुनाया कि न सिर्फ दिखने वाली चीज़ें बल्कि आर्थिक कीमत वाली इलेक्ट्रॉनिक जानकारी भी ज़ब्त की जा सकती है।
फैसले के मुताबिक, बिटकॉइन को एक इलेक्ट्रॉनिक टोकन माना जाता है जिसे उसका मालिक कंट्रोल कर सकता है और दूसरों को ट्रांसफर कर सकता है। इसलिए, यह जांच के लिए एक सही टारगेट है।
क्रिप्टो मार्केट और एक्सचेंज पर असर
वकीलों का कहना है कि इस फैसले से कानूनी उलझन पूरी तरह खत्म हो गई है। जांच करने वालों को अब जांच के शुरुआती स्टेज में ही Upbit और Bithumb जैसे बड़े साउथ कोरियन एक्सचेंज पर तुरंत फंड फ्रीज करने और सीज करने की हरी झंडी मिल गई है।
साउथ कोरिया में बिटकॉइन की पहचान की टाइमलाइन:
2018: सुप्रीम कोर्ट ने बिटकॉइन को जब्त करने लायक एसेट माना।
2021: फ्रॉड कानून क्रिप्टोकरेंसी तक बढ़ाए गए।
2026: सबूत के तौर पर डिजिटल एसेट सीज करने का अधिकार आखिरकार मिल गया है।
एक्सपर्ट्स का मानना है कि साउथ कोरिया और पड़ोसी चीन में कड़े कंट्रोल से क्रिप्टो इंडस्ट्री में ज़्यादा ट्रांसपेरेंसी आएगी, लेकिन इससे यूज़र्स को उस तरह की एनोनिमिटी और "इम्युनिटी" भी नहीं मिलेगी जिसकी कई लोगों को पहले उम्मीद थी।
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