हाल के सालों में, क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल एसेट्स फाइनेंशियल दुनिया में ज़ोरदार बहस का विषय बन गए हैं। इस संदर्भ में, पीपल्स बैंक ऑफ़ चाइना (PBOC) के पूर्व डिप्टी गवर्नर वांग योंगली ने क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल युआन (e-CNY) के डेवलपमेंट पर चीन के मौजूदा रुख पर अपने विचार शेयर किए। उनकी बातें वर्चुअल करेंसी को रेगुलेट करने और फाइनेंशियल सेक्टर में इनोवेशन को सपोर्ट करने के लिए देश के दोहरे नज़रिए को दिखाती हैं।
क्रिप्टोकरेंसी पर चीन का सख़्त रुख
वांग योंगली ने कहा कि चीन क्रिप्टोकरेंसी पर सख़्त रुख बनाए हुए है, जो फाइनेंशियल सिस्टम को कंट्रोल करने और गैर-कानूनी एक्टिविटी से जुड़े रिस्क को कम करने की सरकार की इच्छा को दिखाता है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि डिजिटल युआन के एक्टिव डेवलपमेंट के बावजूद, क्रिप्टोकरेंसी के इस्तेमाल पर रोक जारी रहेगी। इससे पता चलता है कि चीनी अधिकारियों का वर्चुअल करेंसी से जुड़े फ्रॉड और सट्टेबाजी से निपटने के लिए अपने उपायों में ढील देने का कोई इरादा नहीं है।
डिजिटल युआन डेवलपमेंट
साथ ही, वांग ने बताया कि पीपल्स बैंक ऑफ़ चाइना डिजिटल युआन के डेवलपमेंट को एक्टिवली सपोर्ट करता है। उन्होंने कहा कि, मई 2025 से, यूनाइटेड स्टेट्स और हांगकांग ने स्टेबलकॉइन्स और क्रिप्टोएसेट्स पर कानूनी पहल को तेज़ करना शुरू कर दिया है। उनके हिसाब से, इससे चीन को स्टेबलकॉइन्स के प्रति अपने नज़रिए पर फिर से सोचने और डिजिटल युआन को डेवलप करना जारी रखने की ज़रूरत पैदा होती है।
वांग ने ज़ोर देकर कहा कि पीपल्स बैंक ऑफ़ चाइना (PBOC) ने मॉनेटरी सिस्टम में डिजिटल युआन की जगह को ऑप्टिमाइज़ करने, इसके गवर्नेंस मैकेनिज़्म को बेहतर बनाने और इसके डेवलपमेंट को एक्टिवली सपोर्ट करने के अपने इरादे की घोषणा की है। यह दिखाता है कि क्रिप्टोकरेंसी के प्रति अपनी सख़्त पॉलिसी के बावजूद, चीन डिजिटल करेंसी के क्षेत्र में लीडिंग पोज़िशन लेने की कोशिश कर रहा है।
स्टेबलकॉइन डिस्कशन
PBOC में डिस्कशन के दौरान, स्टेबलकॉइन्स को एक तरह की वर्चुअल करेंसी के तौर पर डिफाइन किया गया। वांग योंगली ने बताया कि 28 नवंबर को 13 ऑर्गनाइज़ेशन के साथ हुई मीटिंग में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि वर्चुअल करेंसी को लेकर रोक लगाने वाली पॉलिसी बनी रहेगी। इससे पता चलता है कि स्टेबलकॉइन में दिलचस्पी के बावजूद, चीन क्रिप्टोकरेंसी मार्केट पर अपनी पकड़ ढीली नहीं करना चाहता है।
चीन का दोहरा नज़रिया
वांग के मुताबिक, मौजूदा घटनाएँ क्रिप्टोकरेंसी पॉलिसी को लेकर चीन के दोहरे नज़रिए को साफ़ तौर पर दिखाती हैं। एक तरफ, देश डिजिटल युआन के डेवलपमेंट को एक्टिवली सपोर्ट करता है, जिससे इसे देश और विदेश दोनों जगह बड़े पैमाने पर अपनाया जा सकता है। दूसरी तरफ, वर्चुअल करेंसी से जुड़ी गैर-कानूनी फाइनेंशियल एक्टिविटी से निपटने के लिए कड़े कदम उठाए जाएँगे।
इनोवेटिव डेवलपमेंट का महत्व
वांग ने डिजिटल युआन के इनोवेटिव डेवलपमेंट और बड़े पैमाने पर अपनाने में तेज़ी लाने की अहमियत पर भी ज़ोर दिया। इससे न सिर्फ़ चीन का फाइनेंशियल सिस्टम बेहतर होगा बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उसकी स्थिति मज़बूत होगी। डिजिटल करेंसी स्पेस में ग्लोबल कॉम्पिटिशन के बीच, चीन अपने डिजिटल एसेट्स के लिए एक कुशल और सुरक्षित इकोसिस्टम बनाने की कोशिश कर रहा है।
निष्कर्ष
इस तरह, वांग योंगली के कमेंट्स क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल एसेट्स के बारे में चीन की जटिल और कई तरह की पॉलिसी को दिखाते हैं। देश क्रिप्टोकरेंसी के खिलाफ सख्त रवैया बनाए हुए है, जबकि डिजिटल युआन को एक्टिव रूप से डेवलप कर रहा है। इससे एक अनोखी स्थिति बनती है जिसमें चीन फाइनेंशियल सिस्टम पर सख्त कंट्रोल बनाए रखते हुए डिजिटल करेंसी में एक लीडिंग पोजीशन बनाना चाहता है।